Anna Hajare

Written By ajay

15th November 2019

प्रसिद्द समाजसेवी और गांधीवादी अन्ना हजारे ने एक बार 

आन्दोलन चलाने की घोषणा की है. वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद सरकार की युवाओं से सेना

में शामिल होने की अपील पर अन्ना 1963 में सेना की मराठा रेजीमेंट में ड्राइवर के रूप में भर्ती हो गए।

12 नवम्बर 1965 को चौकी पर पाकिस्तानी हवाई बमबारी में वहां तैनात सारे सैनिक मारे गए। इस घटना

ने अन्ना के जीवन को सदा के लिए बदल दिया। 1975 में जम्मू में तैनाती के दौरान सेना में सेवा के

15 वर्ष पूरे होने पर उन्होंने स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले ली और समाज सेवा में जुट गए.

इनका जन्म 15 जून 1937 दिन मंगलवार को सुबह 08:36 बजे महाराष्ट्र के भिंगर में हुआ है. इनका

जन्मलग्न कर्क और इसका स्वामी चन्द्रमा द्वितीय भाव में है और जन्मराशि सिंह है जिसका स्वामी सूर्य

द्वादश भाव में स्थित है. वर्तमान में शनि की महादशा एप्रिल, 2000 से लगी हुई है और एप्रिल 2019

तक चलेगी. उल्लेखनीय है कि लोकपाल आन्दोलन के समय शनि में चन्द्रमा और मंगल का अंतर चला

था. मंगल के कारण आन्दोलन काफी प्रभावी हो पाया. शनि की महादशा में जनांदोलन होने से इन्हें

काफी ख्याति भी मिली. संचार साधनों के खुलकर उपयोग होने के कारण इस आन्दोलन का प्रभाव समूचे

भारत में फैल गया और इसके समर्थन में लोग सड़कों पर भी उतरने लगे. इन्होंने भारत सरकार से एक

मजबूत भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल विधेयक बनाने की माँग की थी और अपनी माँग के अनुरूप सरकार

को लोकपाल बिल का एक मसौदा भी दिया था. किंतु मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने

इसके प्रति नकारात्मक रवैया दिखाया और इसकी उपेक्षा की.

अभी शनि की महादशा में राहू की अन्तर्दशा चल रही है जो 4 अक्टूवर 2016 तक चलेगी. अभी ‘स्वराज

संकल्प अभियान’ द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले अन्ना हजारे अगले माह 27 फरवरी से

दिल्ली में दो दिवसीय धरने में शामिल होंगे। यहाँ स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि क्या अन्ना का यह

आन्दोलन भी अपार जनसमर्थन हासिल कर सकेगा या नहीं. तो इसका स्पष्ट उत्तर है- नहीं.

पिछले आन्दोलन में भी यह सन्देश मिडिया द्वारा दिलवाया गया था कि पूरे देश में सिर्फ़ और सिर्फ़

अण्णा टीम ही ईमानदार और देशभक्त है और इनसे अलग विचार रखने वाले सभी बे-ईमान और देशद्रोही

है ? यह ज़रूरी नहीं है कि हर ईमानदार और देशभक्त अण्णा का समर्थक ही हो और इसके लिए वह इस

टीम से प्रमाणपत्र हासिल करे ! यह सोच लोकतंत्र विरोधी है ! दूसरी बात कि अण्णा टीम लोकतंत्र के

सभी स्तंभों जैसे संसद, न्यायपालिका, कार्यपालिका आदि को बे-ईमान मानकर चली, जबकि ऐसा नहीं है,

और इन सबको कमजोर/गौण बनाकर लोकपाल को हावी बनाना जिसके चयन में जनता की कोई

भागीदारी नहीं होगी ! इससे लोकतंत्र कमजोर होगा ! सबसे अखरने वाली बात तो यह हुई कि

अण्णा टीम द्वारा अपने सदस्यों पर लगे आरोपों को स्वयम ही नकार दिया जाता रहा और ख़ुद ही

स्वयंभू रुप से ईमानदारी का प्रमाणपत्र हासिल कर लिया जाता रहा! और अंत में केजरीवाल ने अन्ना

आन्दोलन की भावना को ही मिटटी में मिला दिया.

27 फरवरी से चलने वाला आन्दोलन बिलकुल फीका रहेगा और आम जनता इसमें कोई रूचि नहीं ले

सकेगी. इसके गुप्त एजेंडा दुसरे रहेंगे. यह आन्दोलन भी किसी खास स्वार्थी तत्वों द्वारा हाईजैक कर

लिया जायेगा. सबसे बड़ी बात कि शनि-राहू के चलते इसकी फंडिंग के श्रोत भी संदिग्ध रहेंगे. पैसे देने

वालों का महत्त्व बढेगा और अपना समय और जीवन देने वाले कार्यकर्ताओं का महत्त्व क्षीण होगा.

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